क्या कोई 26 साल की उम्र में सिर्फ एक दिन में 77 करोड़ रुपये कमा सकता है? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन IIT कानपुर से पढ़े सिद्धार्थ सक्सेना ने ऐसा दावा किया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड स्टार्टअप इन दिनों काफी चर्चा में भी हैं.

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हाल ही में दिए एक इंटरव्यू के बाद उनकी कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक दिन में करीब 8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 77 करोड़ रुपये कमाए थे.

सिद्धार्थ सक्सेना IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में B.Tech कर चुके हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों के साथ काम किया.

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बाद में उन्होंने अपने साथियों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Merlin की शुरुआत की. यह एक AI बेस्ड गूगल Chrome एक्सटेंशन है, जो ईमेल लिखने, वेब पेज का सार निकालने, कंटेंट तैयार करने और कई दूसरे कामों में मदद करता है.

दरअसल Meril एक्स्टेंशन कई प्रॉब्लम को सॉल्व कर रहा है. ये आम ब्राउजर जैसे क्रोम या एज को भी एजेंटिक ब्राउजर बना देता है. क्रोम यूज करते हुए डायरेक्ट Merlin से आप पेज के कंटेंट को समराइज करने से लेकर उसके बारे में रिसर्च कर सकते हैं.

इस एक्सटेंशन का फायदा ये है कि आपको बार बार जेेनेरेटिव AI यूज करने के लिए किसी दूसरे टैब या वेबसाइट पर नहीं जाना होगा और उसी पेज पर एआई फीचर्स मिल जाएंगे. अगर आपने परप्लेक्सिटी का कॉमेट ब्राउजर यूज किया है तो कुछ ऐसा ही फीचर इसमें भी मिलता है.

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सिद्धार्थ ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने एक साल में सबसे ज्यादा कितनी कमाई की थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर कमाए. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा होने लगी. हालांकि उन्होंने यह रकम किस डील या किस ट्रांजैक्शन से मिली, इसकी पूरी जानकारी पब्लिक नहीं की है.

Merlin की शुरुआत साल 2022 में हुई थी. सिद्धार्थ ने इसे अपने IIT कानपुर के दोस्तों प्रत्युष राय और सिरसेंदु सरकार के साथ मिलकर बनाया. कंपनी तेजी से बढ़ी और रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी वैल्यूएशन करीब 5 करोड़ डॉलर (50 मिलियन डॉलर) तक पहुंच चुकी है. इसके अलावा सिद्धार्थ एक और AI स्टार्टअप Thine के भी को-फाउंडर हैं.

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सिद्धार्थ का कहना है कि भारत में ज्यादातर लोग लिमिटेड रिसोर्सेज के बीच बड़े होते हैं, इसलिए वे रिस्क लेने से बचते हैं. उनके मुताबिक सफल कंपनी बनाने के लिए अलग सोच और बड़े टारगेट जरूरी होते हैं.

सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि अमेरिका में कई लोग सिर्फ अपने पसंद के काम के लिए कंपनी बनाते हैं, जबकि भारत में अक्सर लोग मजबूरी में करियर चुनते हैं.

इंटरव्यू के दौरान सिद्धार्थ ने IIT कानपुर को लेकर भी एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि IIT कानपुर के कंप्यूटर साइंस कोर्स में दाखिला लेना हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से करीब 20 गुना ज्यादा मुश्किल है.

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