पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है. महंगाई, बिजली की कमी, रोजगार की तंगी और अपने अधिकारों की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच पाकिस्तानी सेना के चीफ जनरल आसिम मुनीर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे बंदूकों और दमन के जरिए इस गुस्से को काबू में रख पाएंगे.
और पढ़ें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी काफी भारी है. खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान मिलाकर पाकिस्तानी सेना की कुल संख्या 40 से 50 हजार के बीच है. इसमें नियमित सैनिक, रेंजर्स और अन्य पैरामिलिट्री फोर्स शामिल हैं. हाल ही में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पाकिस्तान ने अतिरिक्त 4000 सैनिक और 8000 रेंजर्स तैनात किए हैं.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के ईरान प्रहार से दूर क्यों है इजरायल, क्या चुपके-चुपके ईरान को चोट देने की तैयारी है
पीओके को दो मुख्य हिस्सों में बांटा जाता है- आजाद कश्मीर (Azad Kashmir) और गिलगित-बाल्टिस्तान. दोनों इलाकों में पाकिस्तानी सेना की अलग-अलग तैनाती है.
आजाद कश्मीर में करीब 15 से 20 हजार नियमित पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं. गिलगित-बाल्टिस्तान में यह संख्या 25 से 30 हजार के आसपास है क्योंकि यहां चीन के साथ सीमा होने के कारण रणनीतिक महत्व ज्यादा है. कुल मिलाकर 40 से 50 हजार पाकिस्तानी सैनिक इस क्षेत्र में मौजूद हैं.
हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों के बढ़ने के बाद पाकिस्तानी सेना ने अतिरिक्त फोर्स भेजी है. मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में भारी संख्या में सैनिक और रेंजर्स तैनात किए गए हैं. भारी हथियारों के साथ इनकी तैनाती स्थानीय लोगों में और ज्यादा आक्रोश पैदा कर रही है.
लोगों का गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
पीओके के लोग लंबे समय से पाकिस्तानी शासन से तंग आ चुके हैं. यहां की अर्थव्यवस्था खराब है. युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि स्थानीय लोग खुद को पाकिस्तानी कब्जे में महसूस करते हैं. वे अपनी जमीन, संसाधनों और अधिकारों पर पाकिस्तानी नियंत्रण को स्वीकार नहीं कर रहे हैं.
हाल के प्रदर्शनों में लोगों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए. सेना द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या के आरोप लगाए. प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत भी हुई है. इस स्थिति में जनरल आसिम मुनीर पर दबाव बढ़ गया है.
यह भी पढ़ें: PoK में सुलगती बगावत रोकने के लिए 8 हजार अतिरिक्त रेंजर्स की तैनाती
जनरल मुनीर की रणनीति - बंदूकों का जोर
जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तानी सेना के प्रमुख हैं. वे सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं. पीओके में बढ़ते विरोध को दबाने के लिए उन्होंने सुरक्षा बलों को पूरा अधिकार दे रखा है. अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और रेंजर्स की भारी संख्या इसी रणनीति का हिस्सा है.
पाकिस्तानी सेना का मानना है कि कुछ बाहरी ताकतें इस अशांति को भड़का रही हैं. स्थानीय विश्लेषक कहते हैं कि असली समस्या आर्थिक और राजनीतिक है. बंदूकों और दमन से गुस्से को दबाया जा सकता है लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता. इतिहास गवाह है कि जबरन दबाए गए गुस्से बाद में और बड़े रूप में फटते हैं.
पाकिस्तानी सेना के पास पीओके में मजबूत तैनाती है, लेकिन आधुनिक समय में सिर्फ सैन्य बल से जनता को काबू में रखना मुश्किल हो गया है. सोशल मीडिया के जरिए लोग अपनी बात दुनिया तक पहुंचा रहे हैं.
अगर जनरल मुनीर सख्त दमन की नीति अपनाते हैं तो तत्काल स्थिति शांत हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह और ज्यादा विद्रोह पैदा कर सकता है. पीओके के लोग अब अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. वे न केवल बेहतर सुविधाएं बल्कि अपनी पहचान और अधिकार भी मांग रहे हैं.
रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय नजरिया
पीओके पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र भारत की सीमा से लगा हुआ है. यहां से सैन्य अभियान चलाना आसान होता है. चीन का सी-पेक प्रोजेक्ट भी इसी क्षेत्र से गुजरता है. इसलिए पाकिस्तान इस इलाके को किसी भी कीमत पर अपने नियंत्रण में रखना चाहता है.
यह भी पढ़ें: इजरायली खुफिया रिपोर्ट- ईरान ने पिकएक्स पहाड़ में छिपाए सीक्रेट न्यूक्लियर मैटेरियल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठन इस दमन की निंदा कर रहे हैं. भारत लगातार पीओके में पाकिस्तानी अत्याचारों की बात उठा रहा है. अगर स्थिति और बिगड़ी तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तानी सेना ने दमन जारी रखा तो पीओके में बड़े स्तर पर अस्थिरता फैल सकती है. जनरल मुनीर के पास दो रास्ते हैं - पहला, सख्त सैन्य कार्रवाई और दूसरा, कुछ राजनीतिक और आर्थिक रियायतें देकर स्थिति को सामान्य करना.
वर्तमान में वे पहले रास्ते पर चल रहे दिख रहे हैं. अतिरिक्त 4000 सैनिकों और 8000 रेंजर्स की तैनाती इसी का संकेत है. लेकिन क्या यह रणनीति लंबे समय तक काम करेगी, यह देखना बाकी है.
---- समाप्त ----